हौंसले के सामने उम्र और पहाड़ पस्त

50 साल से ज्यादा आयु के दो “युवाओं” ने दुनिया के सबसे ऊँचे दर्रे को साइकिल से किया पार

कहते हैं, हौंसलों से बड़ी से बड़ी जंग जीती जा सकती है. और इसे सच कर दिखाया है उदयपुर शहर के कैलाश जैन और डॉ. शरद अयंगर ने. जिस उम्र में अक्सर लोग रिटायर्मेंट की प्लानिंग कर रहे होते हैं, उस उम्र में दोनों ने दुनिया के सबसे ऊँचे पहाड़ी रास्ते को साइकिल से पार किया. उदयपुर साइकिलिंग क्लब से जुड़े 52 साल के कैलाश जैन और 59 साल के डॉ. शरद अयंगर ने मनाली से लेह होते हुए दुनिया के सबसे ऊँचे पहाड़ी दर्रे “खारदुंग-ला” को साइकिल से माप डाला.

जहाँ 18380 फीट ऊँचे खारदुंग- ला का दोपहर का सामान्य तापमान माइनस 3 डिग्री से माइनस 1 डिग्री होता है. वहीँ मनाली- लेह मार्ग दुनिया के सबसे खतरनाक 10 रास्तों में शुमार है. 600 किलोमीटर के इस पहाड़ी कच्चे रास्तों के 10 दिन के कठिनतम साइकिल ट्रिप में जहाँ कैलाश जैन खारदुंग दर्रे के टॉप तक पहुँचने में सफल रहे, वहीँ ऑक्सिजन की कमी के चलते डॉ. शरद को 20 किलोमीटर पहले ट्रिप छोड़ना पड़ा. उल्लेखनीय है कि इस ट्रिप में देशभर के कुल 05 साइकिलिस्ट थे, पर उनमे से 03 साइकिलिस्ट ने लद्दाख पहुँचने से पहले ही सफ़र से खुद को अलग कर लिया था. केवल उदयपुर के इन दो सैकिलिस्ट ने ही लेह तक का सफ़र पूरा किया.

पत्रिका से ख़ास बातचीत करते हुए कैलाश जैन ने बताया कि 11 अगस्त को सभी ने मनाली से सफ़र की शुरुआत की. और 15 अगस्त को आज़ादी के दिन हिमाचल से जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश करते हुए सरचू नामक जगह पर तिरंगा फहराया. रोज़ तकरीबन 50-60 किलोमीटर साइकिल चलते हुए ठीक 10 दिन बाद 20 अगस्त को खारदुंग-ला पास पहुंचे. इस दौरान रोहतांग पास पर भारी ट्रेफिक और कीचड से बहुत परेशानी हुई, वहीँ सफ़र के दौरान कई बार बर्फबारी, बारिश, तेज़ बर्फीली हवाओं से सामना हुआ. पागल नाला और व्हिस्की नाला नामक जगहों पर 20 फीट से अधिक चौड़े पहाड़ी नालों को भी पार किया.

सफ़र के दौरान 16 हज़ार फीट ऊंचाई ऊँचे 05 दर्रों को किया फतह :
कैलाश और डॉ. शरद ने बताया कि सफ़र के दौरान रोहतांग पास, नाकी-ला, लाचूंग-ला, तंगलंग- ला दर्रों को पार करते हुए 18380 फीट ऊँचे खारदुंग-ला पास पहुंचे. इन दर्रों को पार करते समय कई बार ऑक्सिजन काफी कम हो जाती थी, पर फिर भी दोनों ने अपना सफ़र जारी रखा. इस दौरान कई बार उन्हें माइनस डिग्री तापमान में साइकिलिंग करनी पड़ी. रास्ते में गुज़रते मोटर साइकिल सवारों ने दोनों की काफी हौंसला अफजाई की.

योग के साथ होती थी दिन की शुरुआत :
कैलाश ने बताया कि सुबह 6 बजे उठकर सबसे पहले योग सत्र होता था. योग से काफी मानसिक संबल भी मिला. हलके फुल्के नाश्ते के बाद 8 बजे साइकिलिंग की शुरुआत करते थे. शाम को जहाँ पहुँचते वहां कसरत (स्ट्रेचिंग) करने के बाद ही सोते थे. कई बार प्रकृति ने रास्ता रोका पर दोनों ने हौंसला नहीं हारा. डॉ. शरद ने बताया कि सातवें दिन शाम को जब त्सोकर झील पहुंचकर सोये और सुबह उठे तो चारों तरफ सफ़ेद बर्फ की चादर थी. रास्ते बर्फ में कहीं खो से गए थे. ऐसे में स्थानीय लोगों ने रास्ते बनाये और उन्हें वहां से निकाला.

बिना बिजली- मोबाइल के वो 10 दिन :
डॉ. शरद ने बताया कि रोहतांग पास के पार केलोंग नामक जगह पार करने के बाद मोबाइल नेटवर्क लेह तक नहीं मिलता. न बिजली और न ही शौचालय की ही व्यवस्था होती है. रहने के लिए भी केवल टेंट के भरोसे रहना होता है. ऐसे में 10 दिन तक न घर पर बात कर सके और न ही बाकी दुनिया से ही कोई संपर्क हो पाया. कई कई दिन बिना नहाये गुज़ारने पड़े. इसी दौरान मनाली में बाढ़ से हाइवे बहने तथा धारा 370 हटने की ख़बरों के बाद कश्मीर में उपजे हालातों के चलते घर वाले काफी परेशान हो गए . काफी कोशिशों के बाद सरचू नामक एक जगह से सेटेलाईट फोन से 45 सेकण्ड के लिए घर पर बात हुई, जिस से घर वालों को की जान में जान आई.

धारा 370 हटने की खुशियों में हुए शरीक :
जब लेह पहुंचे तो वहां लोग लद्दाख क्षेत्र को केंद्र शाशित प्रदेश बनाने की खुशियाँ मनाते मिले. एक स्थानीय निवासी “दोर्जिंग” का मानना था कि अब उनके क्षेत्र में काफी विकास होगा और गैस सिलेंडर लेने उसे गाँव से लेह तक नहीं आना होगा.

शरीर फिट तो सब हिट :
दोनों साइकिलिस्ट ने अपनी बातचीत में कहा कि लगातार कसरत और उचित डाईट से शरीर को फिट रखा जा एकता है. उन्होंने लोगों को यही सन्देश दिया कि उन्हें एक बार हिमालयी पहाड़ों की सैर ज़रूर करनी चाहिए. ये पहाड़ बचे रहे और हमारा शरीर भी तंदुरुस्त रहे, इसके लिए हमें कार्बन उत्सर्जन घटाना होगा, इसी उद्देश्य से उन्होंने साईकिल को चुना. कैलाश ने कहा कि हमें किसी और से तुलना करने की बजे खुद के गोल सेट करने चाहिए, ताकि हम उन्हें पा सके. दोनों उम्र को सर एक “नंबर” मानते हैं.

अब आगे क्या :
कैलाश जैन ने बताया कि अब वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की “आयरनमेन” प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में एक निश्चित समय में 180 किलोमीटर साईकिलिंग, 42 किलोमीटर दौड़ तथा 4 किलोमीटर तैराकी करनी होती है. उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *